भारत के ‘मैल्कम एक्स’, चन्द्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ की रिहाई के लिए आवाज़

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हम; निम्नलिखित लेखक, फिल्म निर्माता, छात्र, स्कोलर्स तथा सामाजिक आंदोलन; दलित कार्यकर्ता और ‘भीम’ सेना के नेता,चन्द्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के निरंतर, अन्यायपूर्ण कारावास पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करना चाहते हैं।

आज़ाद, जून, 2017 से, कथित रूप से, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होने के कारण कारावास में हैं,किन्तु वास्तविक रूप में,उनके भारत के दलित वर्ग के अधिकारों के लिए हमेशा लड़ने के कारण। ये वह दलित वर्ग है जो बार-बार जातिगत हिंसा, बलात्कार, अमानवीय छुआछूत की प्रथाओं तथा सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक भेदभाव से प्रताड़ित रहा है। दलित पीड़ितों के मामलों में अधिकतम दंड-मुक्ति होने के कारण, उनके पास न्याय-व्यवस्था के द्वारा अपने अधिकारों की रक्षा का मार्ग ज़्यादातर नहीं होता।

हमारा मत यह है कि आज़ाद और उनके साथियों को केवल इसलिए कारावास में डाला गया है क्योंकि उन्होने ऊंची जाति के लोगों की निजी सेनाओं तथा सरकार की राजशक्ति, दोनों से डरना स्वीकार नहीं किया। संयुक्त राज्य अमरीका के काले समुदाय के दूरदर्शी नेता, मैल्कम एक्स की तरह ही, आज़ाद दलित अधिकारों के लिए लड़ने के लिए ऐसे तरीके ईजाद कर रहे हैं जो न केवल रचनात्मक हैं परंतु प्रभावी भी हैं।

शब्दाडंबर से आगे बढ़कर, आज़ाद ने दलितों को ‘भीम सेना’ में नियोजित किया। यह श्री भीमराव अंबेडकर के नाम पर स्थापित है, जो कि भारत के श्रेष्ठतम बुध्द्धिजीवियों में से हैं, और जिनहोने भारत के संविधान को भी प्रारूपित किया। ‘भीम सेना’ का मुख्य कार्य,पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, शिक्षा के प्रचार हेतु तथा ऊंची जाति के वर्ग के लोगों के हिंसात्मक हमलों से स्वयं की रक्षा हेतु, 300 अध्ययन मंडलों की स्थापना करना रहा है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले में, दलित वर्ग तथा ऊँची जाति के राजपूतों में हुई मुठभेड़ के पश्चात आज़ाद को प्रारम्भ में ‘हिंसा के लिए उकसाने’ के जुर्म में गिरफ्तार किया गया। नवम्बर 2017 में अलाहाबाद मुख्य न्यायालय ने सभी चारों मामलों में यह कहते हुए उन्हें जमानत दे दी कि सभी मामले झूठे एवं राजनीतिक रूप से प्रेरित थे। हिंसा में आज़ाद की विशिष्ट भूमिका का या फिर उनके पास कोई भी हथियार होने का कोई भी सबूत पुलिस प्रदान नहीं कर सकी।

 

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